1 इष्ट देवता का परिचय
वृश्चिक राशि के इष्ट देवता श्री हनुमान जी हैं। वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल ग्रह है जो शक्ति, पराक्रम और जुनून का प्रतीक है। हनुमान जी भी असीम बल, भक्ति और सेवा के आदर्श हैं। वृश्चिक जातकों की रहस्यमयी प्रकृति और गहरी भावनाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए हनुमान जी की आराधना अत्यंत आवश्यक है।
2 हनुमान जी और वृश्चिक राशि का संबंध
मंगल ग्रह वृश्चिक राशि का स्वामी है और हनुमान जी मंगल के देवता हैं। वृश्चिक जातकों में गहरी शक्ति और अद्भुत अंतर्दृष्टि होती है। हनुमान जी की भक्ति से वृश्चिक जातकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। मंगल दोष और अंगारक दोष के शमन में हनुमान भक्ति अत्यंत प्रभावी है। वृश्चिक जातकों को हनुमान जी से अत्यंत गहरा आध्यात्मिक संबंध है।
3 पूजन विधि
वृश्चिक जातकों को मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। लाल या केसरिया वस्त्र पहनें। हनुमान मंदिर में सिंदूर और तेल चढ़ाएँ। लाल फूल अर्पित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें। बजरंग बाण का पाठ विशेष परिस्थितियों में करें। संकष्टहारा चतुर्थी पर विशेष पूजा करें।
4 मंत्र और जाप विधि
वृश्चिक राशि के लिए प्रधान मंत्र: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः बोमाय नमः। मंगलवार को 108 बार जाप करें। लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला उपयोग करें। मंगल होरा में जाप सर्वोत्तम है। इसके अतिरिक्त ॐ हनुमते नमः का नित्य जाप भी लाभकारी है। हनुमान चालीसा प्रतिदिन पढ़ें।
5 पूजा के लाभ
हनुमान जी की नियमित पूजा से वृश्चिक जातकों को असीम शक्ति, साहस और आत्मविश्वास प्राप्त होता है। मंगल ग्रह के शुभ प्रभाव से भय, शत्रु और रोगों से मुक्ति मिलती है। मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ती है। जीवन में आने वाली बाधाओं का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। भय और चिंता से मुक्ति मिलती है।
6 विशेष दिन और समय
मंगलवार और शनिवार हनुमान पूजन के सबसे शुभ दिन हैं। मंगल होरा (मंगलवार दोपहर) जाप का उत्तम समय है। हनुमान जयंती पर विशेष पूजा आयोजित करें। संकष्टहारा चतुर्थी और राम नवमी भी विशेष दिन हैं। सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में जाप सर्वाधिक फलदायी है।
7 उपाय
वृश्चिक जातकों को मंगलवार को लाल वस्त्र पहनना चाहिए। हनुमान मंदिर में गुड़-चने का भोग लगाएँ। सिंदूर और तेल चढ़ाएँ। मूंगा रत्न धारण करें। गरीबों को लाल वस्त्र और गुड़ का दान करें। लहसुन-प्याज का त्याग करें। हनुमान चालीसा नित्य पढ़ें। बजरंग बाण का पाठ रक्षा के लिए करें।